उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार प्रदेश में पिछड़ा वर्ग को मिलने वाले 27 फ़ीसदी आरक्षण को 3 भाग में विभक्त कर सभी पिछड़ों को उनके स्थिति के आधार पर आरक्षण देने की तैयारी में है ऐसी घोषणा उत्तर प्रदेश के पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री अनिल राजभर ने की है ,अनिल राजभर ने कहा है कि वर्षों से पिछड़ा वर्ग के नाम पर जो आरक्षण मिला है 14साल में उसका फायदा केवल एक जाति को मिला है परंतु अब ऐसा नहीं होगा उन्होंने कहा कि 27 फ़ीसदी में से 67.56 फ़ीसदी आरक्षण सिर्फ और सिर्फ एक जाति को ही दिया गया।
2017 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने गैर यादव पिछड़ी जातियों को लामबंद कर उत्तर प्रदेश में सत्ता प्राप्त किया ,सत्ता में आने के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जस्टिस राघवेंद्र कुमार की अगुवाई में 4 सदस्यीय उत्तर प्रदेश पिछड़ा वर्ग सामाजिक न्याय समिति का गठन किया जिस ने 2019 में अपनी रिपोर्ट दी हालांकि रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है परंतु उसमें पिछड़ा वर्ग को मिल रहे 27 फ़ीसदी आरक्षण को तीन भागों में बांटने की सिफारिश की गई है यह तीन भाग हैं पिछड़ा, अति पिछड़ा और अत्यंत पिछड़ा। समिति की रिपोर्ट के आधार पर इन तीनों को इनकी स्थिति के आधार पर ही 27 फीसदी आरक्षण का प्रतिशत दिया जाएगा उत्तर प्रदेश की पिछली समाजवादी पार्टी की सरकार के ऊपर उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग, सिपाही और दरोगा समेत तमाम भर्तियों में पिछड़ा वर्ग के आरक्षण को सिर्फ यादवो तक सीमित करने के तमाम आरोप लगे उसी का परिणाम हुआ कि गैर यादव समेत तमाम पिछड़ी जातियों ने खुलकर भारतीय जनता पार्टी का समर्थन किया और 2017 में भारतीय जनता पार्टी उत्तर प्रदेश में सत्तारूढ़ हुई।
हालांकि इस तरह के बंटवारे की मांग करते करते सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने उत्तर प्रदेश की सरकार से ना केवल नाता तोड़ लिया बल्कि अपने मंत्री पद को भी त्याग दिया और अति पिछड़ा और अत्यंत पिछड़ों में बड़ा संदेश दिया परंतु भारतीय जनता पार्टी की वर्तमान सरकार के सामने समस्या यह है कि उसकी साथी पार्टी अपना दल इस मामले पर कई बार अपना विरोध दर्ज करा चुकी है क्योंकि इसमें उसके मूल वोट बैंक पटेल जिन्हें कुर्मी कहा जाता है उसके छिटकने का डर है वहीं पर इक्का-दुक्का जातियों को छोड़कर भाजपा को तमाम पिछड़ी जातियों का समर्थन मिलने की आशा है। क्योंकि लंबे समय से यह चर्चा रही है कि उत्तर प्रदेश में आरक्षण का सर्वाधिक फायदा यादव कुर्मी और जाट को मिलता रहा है।

कैसे होगा बंटवारा-

उत्तर प्रदेश में जस्टिस राघवेंद्र सिंह कमेटी की रिपोर्ट की सिफारिश के अनुसार यदि सरकार आरक्षण का बंटवारा करती है तो उत्तर प्रदेश की कुल 234 पिछड़ी जातियों को तीन भागों में बांटा जाएगा। जिसमें सबसे कम जातियों को पिछड़ा वर्ग में रखा जाएगा उसके बाद अति पिछड़ा वर्ग में कृषक और दस्तकार की श्रेणी में आने वाले रहेंगे और सर्वाधिक आरक्षण अत्यंत पिछड़ा वर्ग को मिलेगा इसमें वह जातियां रहेंगी जो भूमिहीन हैं गैर दस्तकारी का कार्य करती हैं और अकुशल कारीगर हैं इसमें 27 फ़ीसदी आरक्षण को 7 + 11+9 के फार्मूले से बांटा जाएगा सबसे पहले पिछड़ा वर्ग में संपन्न जातियां रहेंगी जिसमें यादव, अहीर ,जाट ,कुर्मी, सोनार और चौरसिया जैसी जातियां होंगी और इन को 7% आरक्षण दिया जाएगा इसके बाद अति पिछड़ावर्ग में गिरी ,गुर्जर ,गोसाई ,लोध, कुशवाहा, कुम्हार, माली और लोहार समेत कुल 65 जातियां रहेंगी जिनको 11%आरक्षण मिलेगा, सर्वाधिक आरक्षण अत्यंत पिछड़ा वर्ग में कुल 95 जातियों को रख कर दिया जाएगा जिसमें केवट ,मल्लाह, निषाद ,राई ,गद्दी, घोसी और राजभर को दिया जाएगा इन्हें कुल 9% का आरक्षण दिया जा सकता है।
उत्तर प्रदेश की सामाजिक स्थिति को समझने वाले विशेषज्ञों के अनुसार यदि इस तरह का फैसला सरकार करती है तो इसे लागू होने के बाद उसके परिणाम बहुत क्रांतिकारी होंगे इसका राजनीतिक फायदा तो भारतीय जनता पार्टी उठाएगी ही, साथ ही साथ तमाम सारी राजनीतिक दलों को भी इसका बड़ा खामियाजा भुगतना पड़ेगा क्योंकि उत्तर प्रदेश में एक जाति को लेकर जो भी राजनीतिक दल बने हैं उनको इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे वैसे इस समय भारतीय जनता पार्टी के पास जिस तरह से राम मंदिर और हिंदुत्व के नाम पर जिस तरह से एक बड़ा सा सवर्ण वोट बैंक है यदि उसी तरह से पिछड़ा वर्ग का एक बड़ा वर्ग उससे जुड़ता है तो उसे बड़ी राजनीतिक मजबूती मिलेगी |

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