यदि पिता इंद्रभद्र सिंह की तरह मेरे साथ व मेरे परिवार के साथ कोई घटना घटती है तो इसका जिम्मेदार सुल्तानपुर प्रशासन होगा-सोनू सिंह

सबका साथ सबका विकास का नारा देने वाली योगी सरकार क्या दिला पाएगी भद्र भाइयों को न्याय?

सौरभ सिंह सोमवंशी

“यदि तुम संजय गांधी के बेटे हो तो मैं भी बाबू इंद्र भद्र सिंह का बेटा हूं”

यह शब्द सुल्तानपुर के इसौली विधानसभा क्षेत्र से तीन बार विधानसभा सदस्य रह चुके और 2019 के लोकसभा चुनाव में मेनका गांधी के खिलाफ मैदान में उतर कर उनको कड़ी टक्कर देने वाले चंद्र भद्र सिंह उर्फ सोनू सिंह के हैं मामला यह है कि 2019 के लोकसभा चुनाव के ठीक पहले पॉलिटिकल पंडितों के अनुसार वरुण गांधी को यह आभास हो गया था कि वह सुल्तानपुर की सीट बचा नहीं पाएंगे , शायद हार जाने के डर से उन्होंने यह निर्णय लिया कि सुल्तानपुर की सीट से वह चुनाव नहीं लड़ेंगे वह अपनी मां और तत्कालीन कैबिनेट मंत्री मेनका गांधी की सीट पीलीभीत से चुनाव लड़ेंगे और उन्होंने अपनी सीट अपनी मां मेनका गांधी को दे दी अब मेनका गांधी सुल्तानपुर की सीट से उम्मीदवार थी जो 35 साल बाद सुल्तानपुर आई थी इसके पहले 35 वर्षों तक सुल्तानपुर से उनका कोई आना जाना नहीं रहा था और दूसरी तरफ सुल्तानपुर से ही 2014 के लोकसभा चुनाव में वरुण गांधी की हर एक तरह से राजनीतिक मदद करने वाले चंद्र भद्र सिंह उर्फ सोनू सिंह समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी गठबंधन के उम्मीदवार थे।
जब चुनाव प्रचार अपने चरम पर पहुंचा तब हमेशा की तरह से राजनीतिक दलों के द्वारा अपने विरोधी प्रत्याशियों के ऊपर आरोप और प्रत्यारोप का दौर शुरू हुआ इसी बीच 2014 के चुनाव के दौरान चंद्र भद्र सिंह और उनके छोटे भाई यश भद्र सिंह ने वरुण गांधी का जो 2014 के लोकसभा चुनाव में सुल्तानपुर में साथ दिया था उसी के परिप्रेक्ष्य में वरुण गांधी ने एक बयान दिया जिसे शियासत में शर्मनाक कहा जा सकता है। उन्होंने कहा कि
“मैं संजय गांधी का लड़का हूं मोनू टोनू से डरने की जरूरत नहीं है ऐसे लोगों से मैं अपने जूते खुलवाता हूं”

उसके बाद पत्रकारों के कुरेदने पर वरुण गांधी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए चंद्र भद्र सिंह ने सिर्फ इतना कहा कि

“मैं भी बाबू इंद्र भद्र सिंह का बेटा हूं”

हालांकि जब चुनाव के नतीजे आए तब मेनका गांधी के हिस्से 488281 मत और सोनू सिंह के हिस्से 444422 मत आए अर्थात गठबंधन के प्रत्याशी चन्द्र भद्र सिंह उर्फ सोनू सिंह भारतीय जनता पार्टी की उम्मीदवार मेनका गांधी से 13000 से अधिक वोटों से चुनाव हार गए।
संजय गांधी की पत्नी, फायर ब्रांड नेता वरुण गांधी की मां और नरेंद्र मोदी की सरकार में कैबिनेट मंत्री मेनका गांधी चुनाव जीत तो गई परंतु इस चुनाव की चर्चा नई दिल्ली तक हुई और चंद्र भद्र सिंह के द्वारा मेनका गांधी को दी गई कड़ी टक्कर की भी चर्चा हुई कुछ दिनों के बाद नरेंद्र मोदी ने मंत्रिमंडल का गठन किया और उसमें मेनका गांधी को जगह नहीं मिली चुनाव के बाद मेनका गांधी नई दिल्ली तो जा चुकी थी परंतु कुछ दिनों के बाद वह सुल्तानपुर आई और उन्होंने एक बयान दिया जिसे लगभग समाचार पत्रों ने प्रमुखता से स्थान दिया उन्होंने बयान दिया कि

“अब नहीं चलेगी भद्र लिखी हुई बसें”

बयान के थोड़ी देर बाद शायद मेनका गांधी को इस बात का एहसास हो गया कि उन्होंने कहीं कुछ गलत तो नहीं कह दिया है उन्होंने तत्काल उसमें सुधार करते हुए कहा कि अब सुल्तानपुर में उत्तर प्रदेश परिवहन निगम की बसें अधिक मात्रा में चलाई जाएंगी।

मगर सुल्तानपुर के साथ-साथ
सियासत में रूचि रखने वाले लोगों को इस बात का आभास हो गया था कि दोनों भाइयों के उत्पीड़न का दौर प्रारंभ हो चुका है ।
समय बीतता गया और 2021 आ गया

और आ गया उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव।

25 फरवरी 2021 को सुल्तानपुर के कूरेभार थाने में चंद्र भद्र सिंह और उनके छोटे भाई यश भद्र के ऊपर कूरेभार थाने में एक मुकदमा भारतीय दंड संहिता की धारा 147 ,148, 149, 323, 452, 336 और 427 में दर्ज किया गया 24 घंटे के अंदर ही तहरीर देने वाले 75 वर्षीय व्यक्ति बनारसी लाल ने उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक को एक पत्र लिखा और उस पत्र में उसने स्पष्ट रूप से या लिखा चंद्रभद्र सिंह और उनके छोटे भाई यश भद्र से मुझको कोई समस्या नहीं है,और मैंने कोई तहरीर भी नहीं दी
मेरा विवाद किसी और से है इन लोगों से नहीं उसने पत्रकारों के सामने भी यह बात कही।

उसने यह भी कहा कि सुल्तानपुर की पुलिस ने ही मुझसे सादे कागज पर हस्ताक्षर करा लिए थे और मुझको तो बाद में पता चला कि मेरी तहरीर पर दोनों भाइयों के ऊपर मुकदमा दर्ज किया गया है और उस शपथ पत्र की कॉपी बनारसी लाल ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री व सुल्तानपुर के पुलिस अधीक्षक को भी भेज दिया।
इस घटनाक्रम की भी चर्चा पूरे उत्तर प्रदेश में हुई और कहा गया की पंचायत चुनाव के मद्देनजर सुल्तानपुर के एक बड़े नेता के इशारे पर दोनों भाइयों को प्रताड़ित किया जा रहा है।

दो महीने और बीते और पंचायत चुनाव संपन्न हो गए पंचायत चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के सुल्तानपुर के तमाम कद्दावर नेताओं और उनके करीबियों को मुंह की खानी पड़ी और जिला पंचायत अध्यक्ष वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी का होने के बावजूद भी सिर्फ और सिर्फ 3 सीटों पर वह सिमट गई बड़े पैमाने पर सोनू सिंह के समर्थकों ने जिला पंचायत के चुनाव में जीत दर्ज की और दूसरी तरफ चंद्र भद्र सिंह सोनू सिंह की छोटी बहन अर्चना सिंह जो असम में राष्ट्रीय राजमार्ग में तैनात आईईएस अधिकारी बस्ती के मूल निवासी पंकज सिंह की पत्नी है उन्होंने धनपतगंज के वार्ड नंबर 24 से बड़े मार्जिन से जीत दर्ज की और चारों तरफ यह चर्चा होने लगी कि अब चंद्र भद्र सिंह का कब्जा जिला पंचायत अध्यक्ष के पद पर हो जाएगा ऐसी खबर सुल्तानपुर के समाचार पत्रों में प्रकाशित हुई।
इसके बाद एक बार फिर से सुल्तानपुर प्रशासन को चंद्र भद्र सिंह सोनू और उनकी पत्नी को दिए गए असलहे के लाइसेंस की सुध आई। सोनू सिंह के समर्थक कह रहे हैं कि लाइसेंस निरस्त करने की साजिश रची जा रही है आदेश की प्रति सुल्तानपुर के जिला अधिकारी ने चंद्र भद्र सिंह सोनू सिंह के पैतृक आवास पर चस्पा कर दिया है दूसरी तरफ चंद्र भद्र सिंह ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक डीजीपी के अलावा तमाम आला अधिकारियों को पत्र लिखकर मामले में हस्तक्षेप की मांग तो की ही है साथ में यह भी मांग की है कि उनका उत्पीड़न करने वालों के खिलाफ कार्यवाही की जाए और यदि ऐसा नहीं किया जाता है तो उनके साथ किसी भी तरह की घटना या दुर्घटना का जिम्मेदार सुल्तानपुर जिला प्रशासन को ही माना जाए और उन्होंने पत्र में यह भी लिखा है कि जिस तरह की कार्यवाही आज उनके साथ की जा रही है ठीक इसी तरह की कार्यवाही 21 वर्ष पहले उनके पिता इंद्रभद्र सिंह के साथ की गई थी और उनको दिया गया असलहे का लाइसेंस निरस्त कर दिया गया था और उनके ऊपर किसी तरह का कोई आपराधिक मुकदमा दर्ज नहीं था तब सुल्तानपुर के जिला अधिकारी अनुराग श्रीवास्तव थे उसके कुछ दिनों के बाद ही 21 जनवरी 1999 को सुल्तानपुर की दीवानी में उनकी भीड़ के बीच में बम मार कर के हत्या कर दी गई थी।

जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव को लेकर सरगर्मी तेज

सुल्तानपुर में कुल 45 जिला पंचायत सीटें हैं जिसमें से भारतीय जनता पार्टी ने सिर्फ और सिर्फ 3 सीटें प्राप्त की है यहां तक कि मेनका गांधी की खासमखास कही जाने वाली बबीता तिवारी भी अपनी सीट हार चुकी है भाजपा की जीती हुई 3 सीटों में से निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष ऊषा सिंह हैं और कहा जा रहा है कि ऊषा सिंह ही भारतीय जनता पार्टी की तरफ से चंद्र भद्र सिंह की छोटी बहन अर्चना सिंह का मुकाबला करेंगी परंतु जिला पंचायत की सिर्फ 3 सीटों पर सिमटी भारतीय जनता पार्टी किस तरह से निर्दलीयों समेत चंद्र भद्र सिंह की टीम का सामना करेगी यह तो वक्त ही बताएगा।परंतु सोनू सिंह के समर्थक यह जरूर कह रहे हैं कि सुल्तानपुर जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव को प्रभावित करने के लिए उनके नेता सोनू सिंह को सत्ता के इशारे पर परेशान किया जा रहा है, और सोनू सिंह ने भी खुल कर के मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में इसका इजहार किया है और स्पष्ट किया है कि यदि उनके साथ कोई घटना या दुर्घटना होती है तो इसका जिम्मेदार सुल्तानपुर जिला प्रशासन को माना जाए,क्योंकि ठीक इसी तरह का कृत्य उनके पिता के साथ किया गया था और कुछ दिनों के बाद उनकी हत्या कर दी गई थी बड़ा प्रश्न यह है कि सबका साथ सबका विकास की बात करने वाली उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ की सरकार क्या इन दो भाइयों को न्याय दिला पाएगी क्या उन अधिकारियों के ऊपर कार्यवाही हो पाएगी जो सत्ता का दुरुपयोग कर इन दो भाइयों के ऊपर दबाव बनाने का प्रयास कर रहे हैं बड़ा प्रश्न यही है।

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