————————————- बीरेंद्र सिंह वरिष्ठ पत्रकार प्रयागराज

विगत दिनों प्रदेश की राजधानी लखनऊ की राजनीतिक गलियारों में राजनीतिक पारा चढ़ता-उतरता रहा।हाल फिलहाल उठापटक शांत हो गया है परंतु कुछ बातें छटकर आ गई। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगीआदित्यनाथ जी का पैर हिंदू समाज में अगंद की तरह जम गया है जिसे हिला पाना अब टेढ़ी खीर हो गई है।इसके निहितार्थ कुछ बिंदु हैं जिन्हें मैं आपको बताना चाहता हूंयोगी आदित्यनाथ की कट्टर हिंदूवादी छवि जो पूरे देश में प्रासंगिक बनती चली जा रही है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने यह महसूस किया कि योगी आदित्यनाथ के अलावा उनके पास दक्षिणपंथी विचारधारा के संवाहक के रूप में अन्य कोई तेजतर्रार व क्वीक एक्शन वाला नेता वर्तमान में नजर नहीं आ रहा है जो सनातन धर्म व संस्कृति का प्रबल पोषक तथा हिंदूवादी छवि के लिए राष्ट्रीय स्तर पर विख्यात हो और भीड़ जुटाऊ से लेकर वोट स्थानांतरित करा सकेंयोगी आदित्यनाथ की इमानदारी व कर्तव्यनिष्ठता जगजाहिर है। कोरोना जैसे महामारी व अन्य आपातकालीन स्थितियों को निपटने के लिए जान जोखिम में डाल कर भी प्रदेश के लगभग सभी जिलों, मंडलों व गांव स्तर तक का दौरा तथा कोरोना पीड़ित मरीजों से हालचाल पुछना इस बात को साबित करता है कि योगी जी के जेहन में मुख्यमंत्री का जो वास्तविक राज धर्म होता है उसे बखूबी से निभाया जाना चाहिए और यही राज धर्म भी है जबकि स्वयं कोरोना पाजटीव हो चुके थे। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को एक बात बार-बार खटकती है कि नौकरशाह से पैराशूट की तरह राजनीति में आकर कैबिनेट में एक महत्वपूर्ण ओहदा दिया जाना राजनीति धर्म का उल्लंघन ही नहीं अपितु न जाने कितने नेताओं के साथ नाइंसाफी भी हैएक बात तो कंफर्म हो गया कि संघ का पूरा का पूरा आशीर्वाद योगी आदित्यनाथ के ऊपर सन 2017 में भी था और आज ही संघ पूरी मजबूती के साथ योगी आदित्यनाथ के साथ खड़ी नजर आ रही है।2017 में भाजपा शीर्ष नेतृत्व उत्तर प्रदेश की कमान भाजपा के राष्ट्रीय संगठन मंत्री रामलाल, मनोज सिन्हा ,केशव प्रसाद मौर्या, सुरेश खन्ना व श्रीकांत शर्मा आदि नामों में से किसी एक पर क्रमवार विचार कर रही थी पर अचानक संघ के हस्तक्षेप से सारी कयासों पर पटाक्षेप हो गया और योगी जी को मुख्यमंत्री बनवाईयोगी आदित्यनाथ जी का एक लंबा राजनीतिक सफर भी रहा है।भारत की सबसे बड़ी पंचायत में संसद सदस्य के बतौर कई बार गोरखपुर से रहनुमाई कर चुके है। भारतीय जनता पार्टी की मातृ संगठन संघ ही बहुत कुछ तय करती थी कि कौन मुख्यमंत्री, राज्यपाल व कुलपति बनेगा आदि परंतु नव भाजपा युग में संघ की बहुत सारी विचारधाराओं को दरकिनार कर बहुत बड़ें- बड़े फैसले मोदी -शाह ने ले लिया था जो संघ को गवारा नही था।कयास तो ऐसा भी लगाया गया था कि जैसे हरियाणा व उत्तराखंड मे हुआ। यह भी सत्य है कि उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ जी के अलावा भाजपा का अन्य कोई भी नेता मुख्यमंत्री यदि होता तो उत्तर प्रदेश में माफिया राज के ऊपर इस तरह से बुलडोजरों का चलाएं जाना संभव नहीं था। अपराधियों के ऊपर लगाम लगाने हेतु पुलिस को खुली छूट भी योगीराज में ही मिला और प्रदेश में लगातार इनकाउंटर शुरू हो गया थाअपराधी अपने जमानतों को कटवा कर जेल के अंदर चले गये थे या प्रदेश छोड़ने के लिए मजबूर हो गये थे।संगठित अपराधों में कमी भी आ गई थी अपवाद स्वरूप छिटपुट घटनाओं को छोड़ कर। यह कार्य योगी जैसे इच्छाशक्ति व दृढ़ संकल्पित व्यक्ति ही कर सकता था जो पूर्णतया ईमानदारी सत्यनिष्ठा व कर्तव्य परायणता की जीवन जीता हैजीरो टॉलरेंस की बात यदि कही जाए तो वर्तमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के व्यक्तित्व पर चरितार्थ होता है। सत्ता पक्ष के 325 विधायकों में कुछ को छोड़ कर कुलबुलाहट इसलिए बनी रहती है कि योगी जी वास्तव में ना खाते हैं ना खाने देने की बात करते हैं को अपने जीवन में हकीकत के रूप में उतार दिये हैं।कहा जाता है कि इमानदारी की जड़ बहुत मजबूत होती है जिसे हिला पाना बेइमान नेताओं के बस की बात नहीं है। विगत दिनों लखनऊ के राजनीतिक गलियारों में सबकुछ ठीक ठाक नहीं था।भाजपा राष्ट्रीय संगठन मंत्री बी०एल० संतोष जी ,संघ के बड़े पदाधिकारी दत्तात्रेय होसबोले व सुनील बंसल,का लगातार लखनऊ डेरा डालना व काबीना मंत्रियों व विधायकों से अलग-अलग मुलाकात फिर रिपोर्ट तैयार कर दिल्ली रवाना होना तथा मोदी -शाह व जेपी नड्डा के साथ बैठक होना कुछ बड़ा होने का अंदेशा थाघटना क्रम यह है कि उत्तर प्रदेश के सियासी हालात को लेकर पहले दिल्ली में 23 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोद,गृहमंत्रीअमित शाह, बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा के साथ संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय हौसबोले की अहम् बैठक हुईइसमें उत्तर प्रदेश बीजेपी प्रदेश संगठन के महामंत्री सुनील बंसल भी शामिल थे। लेकिन सीएम योगी आदित्यनाथ नहीं थे। हालांकि 23 मई के पहले सुनील बंसल की दत्तात्रेय होसबोले के साथ बैठक हुई फिर बंसल बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा से मिले। इसके बाद होसबोले और जेपी नड्डा की पीएम मोदी से बातचीत हुई।आखिर में अमित शाह और जेपी नड्डा की मोदी के साथ बैठक हुई जिसमें दत्तात्रेय होसबोले और सुनील बंसल भी शामिल रहेइसी क्रम में होसबोले कि 24 से 26 मई तक लखनऊ में अहम् बैठक हुई। इस बैठक में सुनील बंसल लखनऊ पहुंचे थे जहां दोनों नेताओं ने अलग-अलग बैठक की थी। दत्तात्रेय ने आर एस एस के यूपी पदाधिकारियों के साथ बातचीत कर बीजेपी और संघ परिवार के संगठनों के बारे में फीडबैक लिया। 26 मई को वापस लौट गए हालांकि लखनऊ के 2 दिन के प्रवास के दौरान न तो होसबोले कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और न बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह या किसी प्रमुख नेता से मुलाकात हुई। दत्तात्रेय के लौटने के दूसरे दिन 27 मई को शाम को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने राज्यपाल आनंदीबेन पटेल से मुलाकात की थी। इस मुलाकात के साथ है कि प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चाएं काफी तेज हो गई थीक्योंकि मौजूदा समय में कुल 53 मंत्री उत्तर प्रदेश सरकार में हैं जबकि मंत्रिमंडल में 60 मंत्री हो सकते हैं। ऐसे में 7 मंत्रियों का स्थान रिक्त है हालांकि प्रदेश सरकार के प्रवक्ता ने इस मुलाकात को शिष्टाचार भेंट करार दिया। आगे इसी क्रम में घटनाक्रम बदलती जाती है। 31 मई को भाजपा राष्ट्रीय संगठन मंत्री बीएल संतोष और राधा मोहन की यूपी में अहम बैठक होती है। बीजेपी के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष और प्रदेश के पार्टी प्रभारी राधा मोहन सिंह यूपी के दौरे में 3 दिन रहे।केंद्रीय नेताओं ने डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और दिनेश शर्मा के आलावा योगी सरकार की करीब एक दर्जन मंत्रियों के साथ एक बंद कमरे में मुलाकात कर फीडबैक लियाइस दौरान केंद्रीय नेताओं ने सभी मंत्रियों से पूछा कि यदि अभी की परिस्थितियों में यूपी विधानसभा चुनाव होते हैं तो नतीजे क्या होंगे? बीजेपी की स्थिति क्या होगी? इसके अलावा यह भी पूछा गया कि पार्टी के विधायक योगी सरकार से नाराज क्यों हैं? बैठकों का दौर समाप्त नहीं होता है 31मई को सीएम आवास पर केंद्रीय नेताओं की बैठक होती है। यूपी की सियासत में पिछले 4 सालों में पहली बार हुआ था जब कोई केंद्रीय नेता योगी आदित्यनाथ की गैरमौजूदगी में अलग-अलग मंत्रियों से बातचीत किया हो। 31मई को रात में बीएल संतोष और राधा मोहन सिंह मुख्यमंत्री आवास पर शाम को योगी आदित्यनाथ के साथ बैठक की और साथ में डिनर भी किया।इस तरह संगठन दोनों के साथ बैठक कर राजनीतिक मियाज को समझने की कवायद की जिसके बाद बड़े फेरबदल किए जाने की चर्चाएं तेज हो गई है। यूपी की सियासी ठोह लेने के बाद बीएल संतोष और राधा मोहन सिंह दिल्ली लौटने से पहले ही कोरोना से निपटने के मामले में भी सरकार और सीएम योगी के कामों की तारीफ की और सरकार में किसी तरह के बदलाव की चर्चाओं को विराम लगाते हुए ऑल इज वेल का संदेश दिये3 जून को संघ की दिल्ली में बैठक एक अहम् बैठक हुई । जिसमें सर संघचालक मोहन भागवत सर कार्यवाह दत्तात्रेय संघ के अन्य सभी महत्वपूर्ण पदाधिकारी शामिल रहे।पश्चिम बंगाल की मौजूदा स्थिति और कोरोना से लेकर उपजी देश की स्थिति पर चर्चा हुई इसके अलावा राजनीतिक स्थिति पर गंभीर चिंतन मनन हुआ। संघ नेतृत्व में सर कार्यवाह दत्तात्रेय और बीजेपी के राष्ट्रीय संगठन महासचिव बीएल संतोष की हाल ही में की गई लखनऊ की राजनीतिक यात्रा के बाद दी गई रिपोर्ट पर विचार विमर्श हुआ। 6 जून को दिल्ली में बीजेपी की बैठक के बाद बीजेपी के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बी०एल०संतोष ने लखनऊ दौरे पर पार्टी के तमाम नेताओं और योगी सरकार में मंत्रियों के साथ फीडबैक लिया था,उसकी रिपोर्ट पार्टी हाईकमान को सौंपी। 5और 6 जून को बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा के घर पर एक बैठक हुई जिसमें अगले साल होने वाले पांच राज्यों के चुनाव पर मंथन किया गया। इस बैठक में पीएम मोदी,राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा,और अरुण सिंह समेत कई राष्ट्रीय महासचिव शामिल थे। इस दौरान उत्तर प्रदेश की मौजूदा स्थिति को लेकर खास चर्चा की गई6 जून को राधा मोहन राजपाल से मिले। बीजेपी के प्रदेश प्रभारी राधा मोहन सिंह ने यूपी की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल से मुलाकात की और उन्हें एक बंद लिफाफा सौंपा।राधामोहन और राजपाल की मुलाकात से सियासी अटकलों का बाजार और गर्म हो गया हालांकि राज्यपाल से मुलाकात के पहले ही योगी मंत्रिमंडल में फेरबदल की अटकलों को राधा मोहन सिंह ने खारिज कर दिया था।उन्होंने राज्यपाल के साथ-साथ विधानसभा अध्यक्ष से भी मुलाकात की थी,मंत्रिमंडल विस्तार योगी के ऊपर छोड़ा गया। राधामोहन ने कहा कि कुछ लोग अपनी ही खेती बोते हैं और काटते हैं। सरकार और संगठन मिलकर अच्छा काम कर रहे हैं, मंत्रिमंडल में जो पद खाली हैं वह भरे जाएंगे। खाली पदों पर मुख्यमंत्री निर्णय लेंगेउनके निर्णय के बाद ही अंतिम निर्णय माना जाएगा। उन्होंने कहा कि पंचायत चुनाव में हमारे बहुत से कार्यकर्ता जीते हैं संगठन और सरकार अच्छी तरह चल रहे हैं। कुछ सीटें खाली हैं इसे लेकर उचित समय पर मुख्यमंत्री निर्णय लेंगे। यही नहीं सही उत्तर प्रदेश के बीजेपी अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने कहा कि योगी जी जैसा मुख्यमंत्री कोई नहीं है, योगी जी जितना काम किया किसी ने उतना काम नहीं किया।इससे पहले की सरकार सभी ने देखी है। जो प्रदेश को लूट लेते थे योगी जी की सरकार में कानून का राज है ।स्वतंत्रदेव सिंह ने साफ कहा कि 2022 का चुनाव योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में लड़ा जाएगा।इन सब परिस्थितियों म़े संघ का हस्तक्षेप प्रासंगिक हो गया था। संघ ने पुनः वीटो पावर योगीजी के लिए लगा दिया था।योगी जी हठयोगी धर्म को निभाते हुए अपने अंदाज में जनसेवा मे अनवरत लगे रहे।सूत्रों के अनुसार पूर्व नौकरशाह से नेता बने अरविंद शर्मा जो मोदीजी के करीबी माने जाते है को लखनऊ की सत्ता में गृहमंत्री बनाने की बात छट कर आई जिसे योगी जी सिरे से खारिज कर दिये।बात भी सही है यदि किसी मुख्यमंत्री से महत्वपूर्ण विभाग गृहमंत्रालय ले लिया जाए तो प्रशासानिक व्यवस्था हाथ से निकल जाएगी। अपुष्ट खबरों की माने तो योगी जी अरविंद शर्मा को राज्यमंत्री का दर्जा देने को तैयार हुए वो भी बामुश्किल से।योगी आदित्यनाथ जी के जिद्दी स्वभाव को संघ व भाजपा नेतृत्व पहले से ही जानता था। सूत्र बताते है कि योगी जी सबकुछ छोड़ गोरखपुर पीठ जाने की बात कह दिये थेभाजपा शीर्ष नेतृत्व व संघ नफानुकसान का आकलन करने लगाएक और समस्या नेतृत्व के सामने थी कि योगी जी को किस आरोप के तहत हटाया जाए जबकि कोई आरोप भी नजर नही आ रहा हैअन्ततोगत्वा अब यह तय हो गया है कि उत्तर प्रदेश में मंत्री मंडल का विस्तार नही होगा, बिधायको की रिपोर्ट कार्ड के अनुसार ही आगामी 2022का टिकट संगठन की सहमति के उपरांत अंतिम मोहर योगी जी की लगेगी,2022 का आम चुनाव योगी जी के चेहरे पर योगी जी के नेतृत्व मे लड़ा जाएगा। योगीजी क्षेत्रीय किन किन दलो से एलाएंस करेगे और किस दल के लिए कितनी सीट छोड़ेंगे यह स्वयं तय करेंगे।बिधायको के परफॉर्मेंस पर ही टिकट दिया जाएगा। इतने सारे अधिकार व उत्तर दायित्व भाजपा नेतृत्व व संघ ऐसे ही नही दे दियाइसके पीछे 2024 के देश के चुनाव का होना महत्वपूर्ण कारण है।उत्तर प्रदेश मे 80 लोकसभा क्षेत्र है और 403 विधानसभा क्षेत्र है।देश का सबसे बड़ा राज्य होने के कारण दिल्ली की कुर्सी का रास्ता उत्तर प्रदेश से ही गुजरता हैविगत दिनों बंगाल चुनाव में भाजपा को सरकार न बना पाने की वजह से राजनीतिक दृष्टिकोण से उत्तर प्रदेश महत्वपूर्ण हो जाता है।भाजपा शीर्ष नेतृत्व उत्तर प्रदेश में किसी प्रकार की जोखिम नही लेना चाहती है वो भी कटृर हिंदू छबि वाले नेता योगी आदित्यनाथ जी को लेकर। यह भाजपा व संघ के कुशल चतुराई का ही प्रतिफल है कि योगी पर आंख मूंदकर भरोसा किया गया। गोरखपुर के सांसद के समय से ही योगी का प्रभाव पूर्वांचल के लगभग 25 जिलों में हिंदुत्व के नाम पर जगजाहिर हैइधर बीच योगीजी खुलेहाथ बल्लेबाजी करने लगे है फलतः भ्रष्टाचार मे संलिप्त दो उपजिलाधिकारी को पदावनत करते हुए तहसीलदार बना दिया। जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक के कार्यालय में सुबह 9 बजे से 11बजे के बीच लैंडलाइन पर योगी जी स्वयं फोन कर सकते है ताकि ताकीद हो सके कि अधिकारी समय से कार्यालय मे जनता की समस्याओं से रूबरू हो रहे है या नही। यदि फोन इन अधिकारियों के आलावा अन्य कोई उठाएगा तो कार्यवाई सुनिश्चित है।यही नहीं जिस जिले से जनता की समस्याओं के बावत लखनऊ प्रार्थना पत्र अधिक आने लगे तो उस जिले के संबंधित अधिकारियों से भी पुछताछ व कार्यवाई सुनिश्चित होना हैजीरो टालरेंस पर काम करने वाले मुख्यमंत्री का हंटर अब तेजी से चलने लगा है।वर्तमान में माफिया डॉन तो सदमें में अवश्य है पर जिला प्रशासन में भ्रष्टाचार कम नही हुआ है जिसपर योगीजी की अब निगाहें टेड़ी होना शुरू हो गई है। योगीजी के लिए 2022का चुनाव उनके आगामी राजनीतिक भविष्य को तय करेगा। अभी विगत कुछ दिनों पूर्व ही एबीपी न्यूज व सी वोटर सर्वे एजेंसी की रिपोर्ट ने जनता से योगीजी के चार साल के कामों पर चर्चा उपरांत घोषणा कर दी थी कि योगी जी पुनः उत्तर प्रदेश में आ सकते है। यही नही बल्कि मोदी के बाद योगी की गिनती देश मे शुरू हो गई हैहालफिलहाल पंचायतों के चुनाव मे भाजपा का परफॉर्मेंस ठीक नहीं रहा इसके बावत भाजपा नेताओं का कहना है कि यह चुनाव स्थानीय मुद्दों और स्थानीय प्रभाव से होता है।बहुत लोग विधानसभा के चुनाव मे लखनऊ की कुर्सी के देखकर वोट देते है और लोकसभा के चुनाव में दिल्ली की कुर्सी व नेतृत्व को देखते है जबकि स्थानीय निकाय के चुनाव मे स्थानीय स्तर पर बहुत सारे फैक्टर काम करते है। पंचम तल के एक अधिकारी की बात मानी जाए तो उत्तर प्रदेश मे चुनाव अभी लगभग 8 माह शेष बचे है इसी चुनावी वर्ष में योगी जी का पूरा का पूरा ध्यान भ्रष्टाचार पर जीरो टालरेंस पर फोकस रहेगा

मोबाइल 9415391278.

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